फोन में रैम कैसे बढ़ाएं? (2025 की सबसे असरदार तकनीकों का पूरा गाइड)

RAM क्या है और यह आपके फ़ोन के लिए इतनी ज़रूरी क्यों है?

 

इससे पहले कि हम रैम बढ़ाने के तरीकों पर बात करें, यह समझना ज़रूरी है कि रैम आखिर है क्या।

RAM (Random Access Memory) को आप अपने फ़ोन का ‘वर्किंग डेस्क’ या ‘काम करने वाली मेज़’ समझ सकते हैं। जब भी आप कोई ऐप खोलते हैं, गेम चलाते हैं, या कोई भी काम करते हैं, तो ऑपरेटिंग सिस्टम (Android या iOS) उस ऐप से जुड़ा ज़रूरी डेटा फ़ोन के स्टोरेज (ROM) से निकालकर रैम पर रख देता है।

  • स्टोरेज (ROM): यह आपके घर का गोदाम है, जहाँ सारा सामान (ऐप्स, फ़ोटो, वीडियो) स्थायी रूप से रखा जाता है।

  • प्रोसेसर (CPU): यह वह कारीगर है जो काम करता है।

  • रैम (RAM): यह वह मेज़ है जिस पर कारीगर (प्रोसेसर) गोदाम (स्टोरेज) से सामान निकालकर काम करता है।

आपकी मेज़ (रैम) जितनी बड़ी होगी, आप एक साथ उतने ही ज़्यादा काम फैलाकर आसानी से कर पाएंगे। अगर रैम कम है, तो प्रोसेसर को बार-बार स्टोरेज से डेटा लाना और ले जाना पड़ता है, जिससे पूरी प्रक्रिया धीमी हो जाती है। यही कारण है कि कम रैम वाले फ़ोन में ऐप्स धीरे खुलते हैं, मल्टीटास्किंग में अटकते हैं और भारी गेम्स नहीं चल पाते।

 

सबसे बड़ा सवाल: क्या फ़ोन में सच में RAM बढ़ाई जा सकती है?

 

इस सवाल के दो हिस्से हैं, और दोनों को समझना बेहद ज़रूरी है।

1. फिजिकल रैम (Physical RAM): नहीं, आप अपने फ़ोन की फिजिकल रैम चिप को बदल या बढ़ा नहीं सकते। कंप्यूटर या लैपटॉप के विपरीत, स्मार्टफ़ोन में रैम चिप मदरबोर्ड पर स्थायी रूप से सोल्डर की हुई होती है। इसे अपग्रेड करना संभव नहीं है। इसलिए, फ़ोन खरीदते समय ही अपनी ज़रूरत के अनुसार सही रैम वेरिएंट (जैसे 6GB, 8GB, 12GB) चुनना महत्वपूर्ण है।

2. वर्चुअल रैम (Virtual RAM): हाँ, और यही वह तकनीक है जिसने खेल को बदल दिया है! पिछले कुछ वर्षों में, स्मार्टफ़ोन निर्माताओं ने एक नई तकनीक पेश की है जिसे वर्चुअल रैम (Virtual RAM) या रैम एक्सपेंशन (RAM Expansion) कहा जाता है।

यह तकनीक आपके फ़ोन के इंटरनल स्टोरेज (ROM) के एक छोटे से हिस्से को अस्थायी रैम के रूप में उपयोग करती है। मान लीजिए आपके फ़ोन में 8GB फिजिकल रैम और 128GB स्टोरेज है। आप वर्चुअल रैम फ़ीचर का उपयोग करके 4GB या 6GB स्टोरेज को उधार लेकर अपनी कुल रैम को 12GB (8+4) या 14GB (8+6) तक बढ़ा सकते हैं।

यह वर्चुअल रैम फिजिकल रैम जितनी तेज़ नहीं होती, लेकिन यह बैकग्राउंड में चल रहे ऐप्स को मैनेज करने और मल्टीटास्किंग को बेहतर बनाने में काफ़ी मदद करती है, जिससे फिजिकल रैम भारी कार्यों (जैसे गेमिंग) के लिए ज़्यादा उपलब्ध रहती है।

 

तरीका #1: वर्चुअल रैम (RAM Expansion) फ़ीचर को कैसे एक्टिवेट करें?

 

2025 में आने वाले लगभग सभी नए एंड्रॉइड स्मार्टफ़ोन यह सुविधा प्रदान करते हैं। इसे चालू करने के स्टेप्स अलग-अलग ब्रांड में थोड़े भिन्न हो सकते हैं, लेकिन प्रक्रिया लगभग समान है:

  1. सेटिंग्स खोलें (Open Settings): अपने फ़ोन की ‘Settings’ में जाएँ।

  2. ‘About Phone’ या ‘My Phone’ पर टैप करें: सबसे ऊपर या सबसे नीचे यह विकल्प मिलेगा।

  3. रैम की जानकारी ढूँढें: यहाँ आपको ‘RAM’ का विकल्प दिखेगा। उस पर टैप करें।

  4. रैम एक्सपेंशन चालू करें: अंदर आपको ‘RAM Expansion’ या ‘Memory Extension’ या ‘Virtual RAM’ का टॉगल (बटन) मिलेगा। इसे ऑन करें।

  5. मात्रा चुनें: अब आपको यह चुनने का विकल्प मिलेगा कि आप कितनी वर्चुअल रैम बढ़ाना चाहते हैं (जैसे 2GB, 4GB, 6GB, 8GB)। अपनी पसंद का विकल्प चुनें।

  6. फ़ोन रीस्टार्ट करें: इस बदलाव को लागू करने के लिए आपका फ़ोन एक बार रीस्टार्ट करने के लिए कहेगा। रीस्टार्ट के बाद, आपके फ़ोन में बढ़ी हुई रैम एक्टिवेट हो जाएगी।

ब्रांड-विशिष्ट लोकेशन:

  • Xiaomi/Poco/Redmi: Settings > Additional Settings > Memory Extension.

  • Samsung: Settings > Battery and device care > Memory > RAM Plus.

  • OnePlus/Oppo/Realme: Settings > About device > RAM.

 

तरीका #2: रैम मैनेजमेंट – बिना बढ़ाए परफ़ॉर्मेंस बढ़ाएं

 

अगर आपके फ़ोन में वर्चुअल रैम का फ़ीचर नहीं है, या आप परफ़ॉर्मेंस को और भी बेहतर बनाना चाहते हैं, तो स्मार्ट रैम मैनेजमेंट सबसे अच्छा तरीका है। इसका मतलब है उपलब्ध रैम का सबसे बेहतर तरीके से उपयोग करना।

1. फालतू ऐप्स अनइंस्टॉल करें (Uninstall Unused Apps): यह सबसे आसान और सबसे प्रभावी तरीका है। हम अक्सर ऐसे ऐप्स इंस्टॉल कर लेते हैं जिनका हम कभी-कभार ही इस्तेमाल करते हैं। ये ऐप्स बैकग्राउंड में चलते रहकर कीमती रैम और बैटरी की खपत करते हैं। अपनी ऐप लिस्ट देखें और उन सभी ऐप्स को हटा दें जिनकी आपको ज़रूरत नहीं है।

2. लाइट वर्ज़न ऐप्स का उपयोग करें (Use Lite Version Apps): कई लोकप्रिय ऐप्स जैसे Facebook, Instagram, Messenger, और Google के ‘Lite’ या ‘Go’ वर्ज़न उपलब्ध हैं। ये ऐप्स कम जगह लेते हैं, कम डेटा खर्च करते हैं और सबसे महत्वपूर्ण, बहुत कम रैम का उपयोग करते हैं। कम रैम वाले फ़ोन के लिए यह एक वरदान है।

3. एनिमेशन स्केल कम करें (Reduce Animation Scale): यह एक प्रो-टिप है जो आपके फ़ोन को तुरंत तेज़ महसूस करा सकती है।

  • डेवलपर ऑप्शन एक्टिवेट करें: Settings > About Phone पर जाएँ और ‘Build Number’ या ‘MIUI Version’ पर 7-8 बार लगातार टैप करें जब तक ‘You are now a developer!’ का मैसेज न आ जाए।

  • एनिमेशन बदलें: अब Settings > Additional/System Settings > Developer options में जाएँ। यहाँ नीचे स्क्रॉल करके ‘Window animation scale’, ‘Transition animation scale’, और ‘Animator duration scale’ को खोजें और इन तीनों को ‘0.5x’ या ‘Animation off’ पर सेट कर दें। इससे ऐप्स के खुलने और बंद होने का एनिमेशन तेज़ हो जाता है।

4. बैकग्राउंड प्रोसेस को सीमित करें (Limit Background Process): डेवलपर ऑप्शन के अंदर ही, आपको ‘Background process limit’ का विकल्प मिलेगा। अगर आपका फ़ोन बहुत ज़्यादा धीमा है, तो आप इसे ‘At most, 2 processes’ पर सेट कर सकते हैं। इससे बैकग्राउंड में सिर्फ़ दो ऐप्स ही एक्टिव रहेंगे। (ध्यान दें: इससे आपको कुछ ऐप्स से नोटिफ़िकेशन मिलने में देरी हो सकती है)।

5. विजेट्स और लाइव वॉलपेपर हटाएं (Remove Widgets & Live Wallpapers): होम स्क्रीन पर मौसम, घड़ी, या समाचार के विजेट्स और चलते-फिरते लाइव वॉलपेपर लगातार रैम का उपयोग करते हैं। इन्हें हटाकर एक सामान्य स्टैटिक वॉलपेपर लगाने से परफ़ॉर्मेंस में काफ़ी सुधार हो सकता है।

6. फ़ोन को नियमित रूप से रीस्टार्ट करें (Restart Your Phone Regularly): हफ़्ते में एक या दो बार फ़ोन को रीस्टार्ट करने से रैम में जमा अस्थायी (cache) और जंक फ़ाइलें साफ़ हो जाती हैं, जिससे फ़ोन फिर से ताज़ा और तेज़ हो जाता है।

 

RAM Booster ऐप्स का कड़वा सच

 

आपको Google Play Store पर “RAM Cleaner” या “RAM Booster” जैसे हज़ारों ऐप्स मिल जाएंगे जो एक क्लिक में रैम बढ़ाने का दावा करते हैं।

सच्चाई यह है कि इनमें से 99% ऐप्स फ़ायदे से ज़्यादा नुकसान करते हैं।

ये ऐप्स जबरदस्ती बैकग्राउंड में चल रहे सभी ऐप्स को बंद कर देते हैं। लेकिन एंड्रॉइड का सिस्टम उन ज़रूरी ऐप्स को कुछ ही देर में फिर से चालू कर देता है। इस बंद करने और फिर से चालू करने की प्रक्रिया में प्रोसेसर और बैटरी पर ज़्यादा ज़ोर पड़ता है, जिससे आपका फ़ोन और भी धीमा हो सकता है। साथ ही, ये ऐप्स विज्ञापनों से भरे होते हैं और आपकी प्राइवेसी के लिए भी ख़तरा बन सकते हैं। इनसे दूर रहना ही सबसे बेहतर है।

 

iPhone यूज़र्स के लिए रैम मैनेजमेंट

 

iPhone (iOS) का रैम मैनेजमेंट एंड्रॉइड से बिल्कुल अलग और बहुत ज़्यादा कुशल होता है। iOS अपने आप बैकग्राउंड ऐप्स को मैनेज करता है, इसलिए iPhone यूज़र्स को मैन्युअल रूप से रैम साफ़ करने की ज़रूरत लगभग कभी नहीं पड़ती। यही कारण है कि 6GB रैम वाला iPhone भी 12GB रैम वाले कई एंड्रॉइड फ़ोन से ज़्यादा स्मूथ चलता है। अगर कभी आपका iPhone धीमा लगे, तो उसे एक बार रीस्टार्ट करना ही काफ़ी होता है।

 

निष्कर्ष: आपके लिए सबसे अच्छा तरीका क्या है?

 

फ़ोन की परफ़ॉर्मेंस को बढ़ाना केवल एक बटन दबाने का काम नहीं है, बल्कि यह स्मार्ट तकनीकों और अच्छी आदतों का एक संयोजन है।

  1. पहला कदम: अपने फ़ोन की सेटिंग्स में जाकर देखें कि क्या उसमें वर्चुअल रैम (RAM Expansion) का फ़ीचर है। अगर है, तो उसे अपनी ज़रूरत के अनुसार एक्टिवेट करें। यह परफ़ॉर्मेंस बढ़ाने का सबसे सीधा और असरदार तरीका है।

  2. दूसरा कदम: अपनी डिजिटल आदतें सुधारें। फालतू ऐप्स हटाएं, लाइट वर्ज़न ऐप्स का उपयोग करें, और विजेट्स कम रखें।

  3. तीसरा कदम: अगर आप थोड़ा और बेहतर अनुभव चाहते हैं, तो डेवलपर ऑप्शन में जाकर एनिमेशन स्केल को कम करें।

  4. चौथा कदम: “RAM Booster” ऐप्स के झांसे में न आएं और अपने फ़ोन को नियमित रूप से रीस्टार्ट करते रहें।

इन तरीकों को अपनाकर, आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि आपका फ़ोन कम रैम होने के बावजूद भी अपनी पूरी क्षमता से काम करे और आपको एक तेज़ और सहज अनुभव प्रदान करे।

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